18 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -6)


धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -6)

*पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........

सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार*
सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)

*सावन सोमवार:-*
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*भगवान भोलेनाथ की प्रसन्नता तथा कृपा प्राप्ति हेतु कुछ लघु महामंत्र:-*

निम्नलिखित मंत्रों मे से किसी भी मंत्र का  प्रतिदिन कम से कम तीन माला का जाप रूद्राक्ष की माला से करने पर मनोकामना पूर्ण होती है ।

1.*ऊर्ध्व भू फट् ।*

2. *नमः शिवाय ।*

3. *ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय ।*

4.* ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा ।*

5. *इं क्षं मं औं अं ।*

6. *प्रौं ह्रीं ठः ।*

7. *नमो नीलकण्ठाय ।*

8. *ॐ पार्वतीपतये नमः ।*

9. *ॐ पशुपतये नम:*

*पौराणिक मंत्र:-*
*ॐ मृत्युंजयमहादेवं त्राहि मां शरणागतम् ।*
*जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै:॥*

*समय मंत्र:-*
*ॐ हौं जू स: मृत्युंजयाय नम:॥*

॥ *बाणलिङ्गकवचम्*॥ 

अस्य बाणलिङ्ग कवचस्य संहारभैरवऋषिर्गायत्रीच्छन्दः, हौं बीजं, हूं शक्तिः, नमः कीलकं, श्रीबाणलिङ्ग सदाशिवो देवता, ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ 

*ॐ कारो मे शिरः पातु नमः पातु ललाटकम् ।*
*शिवस्य कण्ठदेशं मे वक्षोदेशं षडक्षरम् ॥ १॥*

*बाणेश्वरः कटीं पातु द्वावूरू चन्द्रशेखरः ।*
*पादौ विश्वेश्वरः साक्षात् सर्वाङ्गं लिङ्गरूपधृक्॥२॥*

*इतिदं कवचं पूर्व्वं बाणलिङ्गस्य कान्ते पठति यदि मनुष्यः प्राञ्जलिः शुद्धचित्तः । व्रजति शिवसमीपं रोगोशोकप्रमुक्तो बहुधनसुखभोगी बाणलिङ्ग प्रसादतः॥३॥*

*।।इति बाणलिङ्ग कवचं समाप्तम् ॥*

आशुतोष भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिल्व पत्र अर्पित करते हुए या उनके ऊपर जलधारा (अभिषेक) करते हुए बाणलिङ्ग कवचं का पाठ करे ।

*(क्रमंशः)*
*लेख के सातवे भाग मे कल "भगवान शिव के निमित्त व्रत*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
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☀️

*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*बुधवार,19.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम अधिक श्रावण मास।*
*पक्ष- शुक्ल पक्ष ।*
*तिथि- द्वितीया तिथि 20 जुलाई 4:30 am तक*
*चंद्रराशि- चंद्र कर्क राशि मे।*
*नक्षत्र- पुष्य ऩक्षत्र 7:58 am तक*
*योग- वज्र योग 10:26 am तक (अशुभ है)*
*करण- बालव करण 3:18 pm तक* 
*सूर्योदय- 5:35 am, सूर्यास्त 7:20 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- कोई नही*
*राहुकाल- 12:27 pm से 2:10 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- उत्तर दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 20, 27, 29, 30, 31. 

*गण्ड मूल आरम्भ:- 19 जुलाई अश्लेषा नक्षत्र, 7:58 am से 21 जुलाई को मघा नक्षत्र 1:58 pm तक गंडमूल रहेगें।*  गंडमूल नक्षत्रों मे जन्म लेने वाले बच्चो का मूलशांति पूजन आवश्यक है।
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत। 1 अग०- सत्यनारायण/ पूर्णिमा व्रत। 4 अग०- संकष्टी चतुर्थी। 12 अग०- परम एकादशी। 13 अग०- प्रदोष व्रत। 14 अग०- मासिक शिवरात्रि। 16 अग०- अमावस्या। 17 अग०- सिंह संक्रांति -पुण्यकाल- 7:08 am के बाद सारा दिन)। 19 अग०- हरियाली तीज। 21 अग०- नाग पंचमी।22 अग०- कल्कि जयंती। 25 अग०- वरलक्ष्मी व्रत। 27 अग०- श्रावण पुत्रदा एकादशी। 28 अग०- प्रदोष व्रत। 29 मंगलवार ओणम। 30 अग०- रक्षा बंधन। 31 अग०- श्रावण पूर्णिमा व्रत/गायत्री जयंती।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी  से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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आपका दिन मंगलमय हो 💐💐💐
आचार्य मोरध्वज शर्मा 
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश 
9648023364
9129998000

17 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -5)


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*धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -5)*

*पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........*

*सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार*
*सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)*

*सावन सोमवार:-*
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*सावन मास मे शिव पूजन द्वारा कष्ट निवारण हेतु उपाय:-*

1. जिन व्यक्तियों कि कुंडली मे साढेसाती, दूषित चंद्र की दशा-महादशा, अमावस्या-पूर्णिमा या ग्रहण का जन्म हो तो वह जातक व्रत के साथ शिव अष्टोतरी मंत्र का जाप करे।

*शिव अष्टोतरी मंत्र :-* 

  *॥ ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं ॥*

2. मानसिक रोग ( डिप्रेशन, संवेदनशील स्वभाव, वहम ), क्षय रोग, दमा-श्वास रोग, साइनस, मिर्गी तथा किडनी रोगो से पीडित व्यकित या महावारी या स्त्री रोग से पीडित नारियाँ सावन के व्रत या पूजन के साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करे तो निश्चित रूप से लाभ प्राप्त होगा ।

*रूद्र गायत्री मंत्र :-*
 *ॐ पुरुषस्य विद्महे, सहस्राक्षस्य धीमहि ।*
      *तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥*

3. जो लोग मारकेष या लम्बी बीमारी से ग्रस्त हो वह सावन मास मे पूजन के साथ प्रतिदिन 11माला लधुमृत्युंजय मंत्र के साथ ॥ नमः शिवाय ॥ मंत्र का जाप करे तो केवल एक महीने के जाप के प्रभाव से मृत्युशैया से भी उठ खडे होगे ।

*लघुमृत्युंजय मंत्र :-*  
*॥ ॐ ह्रौं जू  सः ॥*

4. वास्तु शुद्धि अथवा गृह शुद्धि के लिए सावन मास मे अपनी क्षमतानुसार एक बार, पांच बार, सावन के चारो सोमवार या सावन माह मे लगातार रूद्राभिषेक करवाये ।

5. *भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र:-*
*। ॐ नमः शिवाय ।* 

यह अमोघ एवं मोक्षदायी है, पंचाक्षर स्तोत्र अत्यंत पुण्यदायी व मनोरथो को पूर्ण करने वाला, समस्त भय को दूर करने वाला तथा मोक्ष प्रदान करने वाला स्तोत्र है ।

6. *शिव पंचाक्षर स्त्रोत:-*
*नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय ।*
*नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे "न" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे महेश्वर! आप नागराज को हार स्वरूप धारण करने वाले हैं। हे (तीननेत्रों वाले) त्रिलोचन आप भस्म से अलंकृत, नित्य (अनादि एवं अनंत) एवं शुद्ध हैं। अम्बर को वस्त्र सामान धारण करने वाले दिग्मबर शिव, आपके न् अक्षर द्वारा जाने वाले स्वरूप को नमस्कार ।

*मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।*
*मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे "म" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- चन्दन से अलंकृत, एवं गंगा की धारा द्वारा शोभायमान नन्दीश्वर एवं प्रमथनाथ के स्वामी महेश्वर आप सदामन्दार पर्वत एवं बहुदा अन्य स्रोतों से प्राप्त्य पुष्पों द्वारा पुजित हैं। हे म् स्वरूप धारी शिव, आपको नमन है।

*शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।*
*श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै"शि" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे धर्म ध्वज धारी, नीलकण्ठ, शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले महाप्रभु, आपने ही दक्ष के दम्भ यज्ञ का विनाश किया था। माँ गौरी केकमल मुख को सूर्य सामान तेज प्रदान करने वाले शिव, आपको नमस्कार है।

*वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय ।*
*चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै"व" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- देवगणो एवं वशिष्ठ्ठ , अगस्त्य, गौतम आदि मुनियों द्वार पुजित देवाधिदेव! सूर्य, चन्द्रमा एवं अग्नि आपके तीन नेत्र सामन हैं। हे शिव आपके व् अक्षर द्वारा विदित स्वरूप कोअ नमस्कार है।

*यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय ।*
*दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे यज्ञस्वरूप, जटाधारी शिव आप आदि, मध्य एवं अंत रहित सनातन हैं। हे दिव्य अम्बर धारी शिव आपके शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले स्वरूप को नमस्कारा है।

*पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ ।*
*शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥*

अर्थ :- जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मंत्र का नित्य ध्यान करता है वह शिव के पुुण्य लोक को प्राप्त करता है तथा शिव के साथ सुख पुर्वक निवास करता है।

7. विषम काल में यदि कोई गंभीर या लाइलाज शारीरिक कष्ट, मारकेष या गहरा संकट आ जाये निम्नलिखित मंत्र का सवा लाख जप बड़ी से बड़ी समस्या, विघ्न या शारीरिक कष्ट को टाल देता है।

*महामंत्र:-*
*ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ*

*(क्रमंशः)*
*लेख के छठे भाग मे कल "भगवान भोलेनाथ की प्रसन्नता तथा कृपा प्राप्ति हेतु कुछ लघु महामंत्र*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
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☀️

*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*सोमवार,17.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- अमावस्या तिथि 18 जुलाई 00:01 am तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मिथुन राशि मे 10:32 am तक तदोपरान्त कर्क राशि।*
*नक्षत्र- पुनर्वसु ऩक्षत्र 18 जुलाई 5:11 am तक*
*योग- व्याघात योग 8:58 am तक (अशुभ है)*
*करण- चतुष्पद करण 11:02 am तक* 
*सूर्योदय- 5:34 am, सूर्यास्त 7:20 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 12 pm से 12:55 pm*
*राहुकाल- 7:17 am से 9:01 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पूर्व दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी  से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
आचार्य मोरध्वज शर्मा 
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश।।
9648023364
9129998000

15 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -4)


धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -4)


पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........

सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार
सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)

सावन शिवरात्रि जलाभिषेक- 15/16 जुलाई।
सावन शिवरात्रि:- 15 जुलाई

सावन सोमवार:-
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*सावन माह मे भगवान शिव की अराधना के द्वारा मनोकामना पूर्ण करने के उपाय:-*

1. धन अथवा लक्ष्मी तथा जीवन मे शांति पाने के लिए बेलपत्र या दूब से शिवपूजन करे।

2. आयु तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए चम्पा के फूलो से, विद्या पाने के लिए सावन मास मे मल्लिका या चमेली के फूलो से "श्री हरि" की पूजा करे।
  
3. संतान या पुत्र की इच्छा करने वाले मनुष्य सावन मास मे कटेरी के पत्तों से शिव तथा विष्णु पूजन करे।

4. बुरे अर्थात अशुभ स्वप्नों से परेशान हो तो मुक्ति हेतु  धान्य यानि अनाज से शिव पूजन करे।

5. बिल्वपत्रों पर चंदन से "ऊँ नमः शिवाय" लिखकर उन पत्तों की माला बनाकर भोलेनाथ को अर्पित करें। बिल्वपत्र कहीं से भी फटे हुए यानि खण्डित नही होंने चाहिए।
 
(शास्त्रों मे इन फूलो या पत्तों को अर्पण करने की संख्या एक लाख कही गई है, जोकि अब संभव नही है अतः इन्हें दस की संख्या मे अर्पित करे।)

6. रोगों से परेशान हैं अौर दवाईयां लेने के बाद भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा हो तो, जल में दूध अौर काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करने पर सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है, तथा रोग मुक्ति हेतु कुशा मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने से किसी भी प्रकार की व्याधि अर्थात रोग से मुक्ति मिलती है।
 
7. जल में केसर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएं दूर होती है। इसके साथ ही गृहस्थ जीवन में आ रही परेशानियां भी दूर हो जाती है। 
 
8. कुंडली में शनि दोषपूर्ण है अौर पीड़ा दे रहा है तो जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से शीघ्र राहत मिलेगी।
 
9. शिवलिंग पर दूर्वा अर्पित करें। इससे दीर्घायु होती है। ऐसा करने से भोलेनाथ के साथ-साथ श्रीगणेश की भी कृपा प्राप्त होती है। 
 
10. नियमित रूप से आंकड़े (आक) के फूल  की माला बनाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती है। 
 
11. शिवलिंग पर चावल अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास स्थाई हो जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर अर्पित चावल खंड़ित न हो। ऐसा करने से भगवान शिव के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। 
 
12. प्रतिदिन शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करने से घर अौर संतान से संबंधित समस्याएं दूर होती है। इससे संतान के कार्यों में भी सफलता मिलती है।

13. *विशेष:-* विवाहित महिलाएं जिनके दाम्पत्य जीवन मे किसी प्रकार की कमी, कष्ट या दुख आ गया हो वह, तथा विवाह योग्य वह कन्यायें जिनका विवाह होने मे बाधा आ रही हो उन्हे सावन माह के 30 व्रत या सावन के चारो सोमवार के व्रत करने चाहिए तथा साथ मे 40 दिन तक गौरी पूजन करना चाहिये, इससे बाधा- दुख इत्यादि समाप्त होकर सुखी विवाहित जीवन प्राप्त होगा ।

14. पुरूषों को यह व्रत करने से, तथा साथ मे शिवगायत्री मंत्र करने से कारोबारी जीवन मे तरक्की, तथा आर्थिक रूप से मज़बूती मिलती है।
शिव गायत्री मंत्र :-
*ॐ सदाशिवाय विद्महे सहस्राक्ष्याय धीमहि।*
*तन्नः साम्बः प्रचोदयात्॥*

15. जिनकी कुंडली मे कालसर्पदोष या पितृदोष हो, तथा जो व्यक्ति नशे, जुआ, तथा चरित्रहीनता जैसी बुरी लतो के न छोड़ पा रहे हो, वह लोग विधिवत् व्रत रखकर आराधना करते हुए प्रतिदिन "श्री शिवापराध क्षमा स्तोत्र" का पाठ करे, तथा भगवान शिव से अपने पाप कर्मो से मुक्ति हेतु प्रार्थना करे।

 चरित्रहीनता तथा अन्य कर्मो से कुलषित हुआ उनका कुल तथा पूर्वज जोकि परलोक से उनके कर्मो को देखते हुए पीड़ा मे तडपते होगें, उन पितरो को को राहत मिलेगी, तथा स्वंय वह मनुष्य अगले जन्मो मे पापो की पुनरावृत्ति से बचते हुए पशु योनि मे जाने से बचेगे । इससे निश्चित रूप से उनके पितरो का उद्धार होगा।

*(क्रमंशः)*
*लेख के पांचवे भाग मे कल "सावन मास मे शिव पूजन द्वारा कष्ट निवारण हेतु उपाय"।*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
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☀️

*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*रविवार,16.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- चतुर्दशी तिथि 10:08 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मिथुन राशि मे।*
*नक्षत्र- आद्ररा ऩक्षत्र 17 जुलाई 2:39 am तक*
*योग- ध्रुव योग 8:33 am तक (शुभ है)*
*करण- विष्टि करण 9:17 am तक* 
*सूर्योदय- 5:33 am, सूर्यास्त 7:21 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 11:59 am से 12:55 pm*
*राहुकाल- 5:57 pm से 7:21 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पश्चिम दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 

*भद्रा:-*  15 जुलाई 8:33 pm से 16 जुलाई 9:21 am तक (भद्रा मे मुण्डन, गृहारंभ, गृहप्रवेश, विवाह, रक्षाबंधन आदि शुभ काम नही करने चाहिये , लेकिन भद्रा मे स्त्री प्रसंग, यज्ञ, तीर्थस्नान, आपरेशन, मुकद्दमा, आग लगाना, काटना, जानवर संबंधी काम किए जा सकतें है)
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

कौन था पहला कावड़िया


कौन था पहला कावड़िया 
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किसने किया था सबसे पहले शिव लिंग का जल अभिषेक?

श्रावण का महीना आते ही हर कोई शिव की भक्ति में झूमने लगता है. इस पावन त्यौहार में पुरे उत्तर भारत और अन्य राज्यो से कावड़िये शिव के पवित्र धामो में जाते है तथा वहां से गंगाजल लाकर शिव का जलाभिषेक करते है.

कावड़ियो को नंगे पैर बहुत दूर चलकर गंगा जल लाना होता है तथा शर्त यह होती है की कावड़ी, शिव कावड़ को जमीन में नही रखता. इस प्रकार शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का समाना करके गंगा जल लाते है तथा उससे शिव का जलाभिषेक करते है.

परन्तु क्या आपने कभी यह सोचा है की आखिर वह कौन पहला व्यक्ति होगा जो सबसे पहला कावड़ी था तथा जिसने सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त करी व इस परम्परा का आरम्भ हुआ.ऋषि जमदग्नि ने उनका बहुत अच्छी तरह से आदर सत्कार किया उनकी सेवा में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी . सहस्त्रबाहु ऋषि के आदर सत्कार से बहुत ही प्रसन्न हुआ परन्तु उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी की आखिर एक साधारण एवम गरीब ऋषि उसके और उसकी सेना के लिए इतना सारा खाना कैसे जुटा पाया .

तब उसे अपने सेनिको से यह पता लगा की रसिहि जमदग्नि के पास एक कामधेनु नाम की दिव्य गाय है. जिससे कुछ भी मांगो वह सब कुछ प्रदान करती है.

जब राजा को यह ज्ञात हुआ की इसी कामधेनु गाय के कारण ऋषि जमदग्नि संसाधन जुटाने में कामयाब हो पाया तो उस गाय को प्राप्त करने के लिए सहस्त्रबाहु के मन में लालच उतपन्न हुआ.

उसने ऋषि से कामधेनु गाय मांगी परन्तु ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु गाय को देने से मना कर दिया. इस पर सह्त्रबाहु अत्यंत कोर्धित हो गया तथा उसने कामधेनु गाय को प्राप्त करने के लिए ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी.

जब यह खबर परशुराम को पता लगी की सहस्त्रबाहु ने उनके पिता की हत्या कर दी है तथा वह कामधेनु गाय को अपने साथ ले गया है तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए. उन्होंने सहस्त्रबाहु के सभी भुजाओ को काट कर उसकी हत्या कर डाली.बाद में परशुराम ने अपने तपस्या प्रभाव से अपने पिता जमदग्नि को पुनः जीवनदान दिया. जब ऋषि को यह बात पता चला की परशुराम ने सहस्त्रबाहु की हत्या कर दी तो उन्होंने इसके पश्चाताप के लिए परशुराम जी से भगवान शिव का जलाभिषेक करने को कहा.

तब परशुराम अपने पिता के आज्ञा से अनेको मिल दूर चलकर गंगा जल लेकर आये तथा आश्रम के पास ही शिवलिंग की स्थापना कर शिव का महाभिषेक किया व उनकी स्तुति करी .

जिस क्षेत्र में परशुराम ने शिवलिंग स्थापित किया था उस क्षेत्र का प्रमाण आज भी मौजूद है. वह क्षेत्र उत्तरप्रदेश में आता है तथा पूरा महादेव के नाम से 
प्रसिद्ध है।
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सावन मे कांवड यात्रा तथा जलाभिषेक, भाग-1


लेख:-सावन मे कांवड यात्रा तथा जलाभिषेक, भाग-1

वर्ष 2023 मे कांवड़ यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से होगी और 15 जुलाई 2023 तक चलेगी।

सावन माह शिवरात्रि जलाभिषेक:-
हिंदू शास्त्रों के मुताबिक मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। लेकिन सावन की शिवरात्रि का अलग महत्व है। इस दिन भगवान आशुतोष की विशेष पूजा अर्चना के साथ शिवालयों में जलाभिषेक तथा कावंडियो द्वारा लाये गये गंगाजल से अभिषेक करके अपनी कांवड यात्रा को पूर्ण करने की परंपरा है।

पंचांग के अनुसार साल 2023 में सावन महीने में शिवरात्रि 15 जुलाई, शनिवार को पड़ेगी।
सावन मास की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 15 जुलाई को शाम 8:33 बजे से प्रारम्भ होकर इसका समापन 16 जुलाई को रात्रि 10:09 बजे पर होगा। मंदिरों में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन शिवभक्त भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करेंगे। 

*चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:- 15 जुलाई- 8:33 pm* 
*चतुर्दशी तिथि समाप्त:- 16 जुलाई-10:09 pm* 

15 जुलाई को प्रदोष काल एवं 16 जुलाई को शिवलिङ्ग पर जलाभिषेक हेतु प्रातःकाल सूर्योदय के पश्चात् 2 घण्टे 24 मिनट का समय श्रेष्ठ रहेगा। 

*श्रावण शिवरात्रि जलाभिषेक मुहूर्त:-*
*1. 15 जुलाई प्रदोषकाल मुहूर्त- 7:30 pm से 9:32 pm तक*
*2. 16 जुलाई प्रातः 5:38 am से 8:22 am तक, तत्पश्चात सायः 7:29 pm से 9:31 pm तक*

*विशेष:-* भक्तगण इन मुहूत्तों में से कांवड़ जलाभिषेक हेतु जल को लाने एवं जलांजली अभिषेक हेतु कोई भी मुहूर्त्त ग्रहण कर सकते हैं*

*विशेष:-* कुछ विद्वान मुख्य मुहूर्त्त यानि श्रावण शिवरात्रि, वाले दिन सारा दिन ही अभिषेक करते हैं, तथा कुछ प्रदोषकाल व निशीथ में जलाभिषेक करते हैं। आर्द्रा नक्षत्र तथा मिथुन लग्न विशेष रूप से शिव पूजन एवं जलाभिषेक के लिए शुभ माना गया है।

हिन्दू धर्म मे श्रावण माह में शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन वेद तथा पुराणो में किया गया है। चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है। शिव मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है।

सावन का यह माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। कांवड़ियों द्वारा जल लाने की यात्रा के आरंभ की कुछ तिथियाँ होती हैं। इन्ही तिथियों पर कांवड़ियों को यात्रा करना शुभ रहता है। 

श्रावण के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा काँवर यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लाखों शिव भक्त दूरस्थ तथा दुर्गम स्थानों जैसे गोमुख, श्री अमरनाथ, श्री हरिद्वार, नीलकण्ठ एवं गंगा आदि तीर्थो से पवित्र गंगाजल के कलश से भरी काँवड़ को अपने कंधों रखकर पैदल लाते हैं और उस गंगा जल से भगवान् शिव के प्रतिष्ठित मन्दिरों, ज्योतिर्लिङ्गों, विग्रहों, स्वरूपों तथा क्षेत्रीय मन्दिरों में शिवभक्त कांवड़ियों द्वारा श्रद्धारूपी श्रीगङ्गाजल का अभिषेक किया जाता है।   

स्कन्दपुराणानुसार श्रावण मास में नियमपूर्वक नक्त व्रत करना चाहिए, और महीने भर प्रतिदिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

प्रतिवर्ष होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को काँवरिया अथवा काँवड़िया कहा जाता है। भगवान् शिव की प्रसन्नता हेतु आषाढ़ पूर्णिमा से लेकर सम्पूर्ण श्रावण मास, शिवभक्त कांवड़िये तीर्थ स्थलों तथा अन्य तीर्थ स्थलो से गंगा जल लाकर इसी प्रकार से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

*कांवड लाने तथा जलाभिषेक करने का पौराणिक महत्व:-*
हिन्दू धर्म शास्त्रों मे प्रतिवर्ष सावन मास में कांवड लाने तथा भगवान शिव का जलाभिषेक करने के कई कारणों का उल्लेख किया गया है, जिसमें से दो मुख्य कारण इस प्रकार से है-

*1. प्रथम कारण:-*
सतयुग मे देवासुर संग्राम के समय समुद्र मंथन से जो 14 रत्न प्राप्त हुए थे, उनमे "अमृतकलश" से पहले "कालकूट" नामक हलाहल यानि विष भी प्राप्त हुआ था। सृष्टि की रक्षा तथा सर्वकल्याण हेतु उस भयंकर विष को स्थान देने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया, उस विष को कण्ठ मे धारण करने से विष के घातक प्रभाव से भगवान शिव का बदन भयानक गरमी से झुलसने लगा, तब इस भीषण जलन से मुक्ति प्रदान करने के लिए देवी-देवताओ, ऋषियों-मुनियों तथा शिवगणों ने गंगाजल, तथा अन्य पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव का अभिषेक करके, विष की तीव्र ज्वाला को शान्त किया। 

तभी से श्रावण मास मे शिवकृपा पाने हेतु सावनमास की पूजा, अभिषेक तथा कांवड़ यात्रा की परंपरा शुरू हुई, और तभी से ही विष के कण्ठ मे धारण विष के प्रभाव से भगवान शिव को नीलकंठ भी क्हा जाने लगा ।

शिवपुराण' में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में आराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है।

*2. द्वितीय कारण:-*
भगवान शिव को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है, क्योंकि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे, और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है। अतः शिवभक्तो ने भगवान शिव की प्रसन्नता पाने हेतु सावन मास में भगवान का जलाभिषेक करना प्रारम्भ कर दिया।


*सावन मे शिव जलाभिषेक का फल:-*
श्रावण मास भगवान शिव का जलाभिषेक करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इस विषय में प्रसिद्ध एक पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास में जो भी मनुष्य कांवड लाता अथवा शिव का जलाभिषेक करता है, उसकी समस्त इच्छाएं पूर्ण होती है। 

इन दिनों किया गया जलाभिषेक, दान-पुण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल देने वाला होता है। इस जलाभिषेक के फलस्वरूप  अनेक कामनाएं तथा उद्देश्यों की पूर्ति हो सकती है, इससे सुखी वैवाहिक जीवन, संतान सुख, सुख-समृद्धि प्राप्ति, मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति, तथा संतान सुख अर्थात कुल वृद्धि कारक होता है। इससे लक्ष्मी प्राप्ति और यश-कीर्ति भी प्राप्त होती है।

कुछ लोगों का भ्रम है कि श्रावण भाद्रपद मास में नदियां रजस्वलारूप हो जाने से उनका जल पवित्र नहीं होता। परन्तु स्कन्दपुराण में स्पष्ट लिखा है कि सिन्धु, सूती, चन्द्रभागा, गंगा, सरयू, नर्मदा, यमुना, प्लक्षजाला, सरस्वती- ये सभी नंदसंज्ञा वाली नदियां रजोदोष से युक्त नहीं होती है। ये सभी अवस्थाओं में निर्मल रहती है।

*(समाप्त)*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
*2. 15 जुलाई के पंचांग मे "सावन शिवरात्रि पर भक्तो तथा कांवडियो द्वारा जलाभिषेक" विषय पर लेख।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*शनिवार,15.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- त्रयोदशी तिथि 8:32 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे 11:22 am तक तदोपरान्त मिथुन राशि।*
*नक्षत्र- मृगशिरा ऩक्षत्र 16 जुलाई 00:23 am तक*
*योग- वृद्घि योग 8:22 am तक (शुभ है)*
*करण- गर करण 7:52 am तक* 
*सूर्योदय- 5:33 am, सूर्यास्त 7:21 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 11:59 am से 12:55 pm*
*राहुकाल- 9 am से 10:43 am (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पूर्व दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 15, 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

14 जुलाई 2023

हरियाली अमावस्या/दर्श अमावस्या, शुद्ध श्रावण अमावस्या, 17.07.2023, भाग-3


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*लेख:- हरियाली अमावस्या/दर्श अमावस्या, शुद्ध श्रावण अमावस्या, 17.07.2023, भाग-3*
अंतिम*

*अमावस्या तिथि आरंभ- 16 जुलाई 10:08 pm*
*अमावस्या तिथि समाप्त- 17/18 जुलाई मध्यरात्रि 00:01 am*

*हरियाली अमावस्या के पर्व द्वारा बारह राशियों के अनुसार  पर्यावरण की रक्षा हेतु वृक्षारोपण।*


 हरियाली अमावस्या का पर्व मनुष्यों को, प्राणी जगत तथा पर्यावरण के सरंक्षण हेतु पेड-पौधों का क्या महत्व है, इस संबंध में भी जागरूक करता है। 

हिन्दू धर्म के त्रिकालदर्शी ऋषियों तथा सिद्ध साधु-महात्माओ ने प्राचीन काल में पर्यावरण के  सरंक्षण के लिए पेड़-पौधे तथा वृक्षो की महत्ता को समझते हुए, मनुष्यों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करने के लिए ही 'हरियाली अमावस्या' के पर्व को वृक्षारोपण के साथ जोडा।

अतः प्राचीन काल से ही हिन्दु धर्म के अनुयायी  हरियाली अमावस्या के अवसर पर ऐसे पेड-पौधे तथा वृक्षों का रोपण करते आ रहे हैं, जोकि हिन्दू धर्म मे शुभ, सम्पूर्ण प्राणी जगत के लिए लाभदायक तथा पर्यावरण के सरंक्षण के लिए अत्यंत फायदेमंद होते हैं।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बारह राशियाँ होती है, प्रत्येक मनुष्य को अपने जन्म समय एक राशि प्राप्त होती है, जिसके अनुसार मनुष्य जीवन भर शुभाशुभ फल को प्राप्त करता है। प्रत्येक जन्म राशि किसी न किसी पेड़-पौधे तथा वनस्पतियों का प्रतिनिधित्व करती है। अपनी इसी जन्म राशि के अनुसार शुभ फल प्राप्त करने के लिए मनुष्यों को हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए।



*1. मेष राशि:-*
मेष राशि के जातकों को 'खैर अथवा अनार' के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*2. वृष राशि:-*
वृष राशि के जातकों को "गूलर, अशोक के वृक्ष अथवा सीताफल" के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*3. मिथुन राशि:-*
मिथुन राशि के जातकों को 'अपामार्ग या आंवले वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*4. कर्क राशि:-*
कर्क राशि के जातकों को 'ढ़ाक अथवा नारियल' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*5. सिंह राशि:-*
सिंह राशि के जातकों को  "आक (अर्क) यानि सफेद आंकड़े अथवा बेल के वृक्ष" के पौधे का रोपण करना चाहिए।

*6. कन्या राशि:-*
कन्या राशि के जातकों को 'अपामार्ग, नीम अथवा अशोक' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*7. तुला राशि:-*
तुला राशि के जातकों को 'गूलर' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*8. वृश्चिक राशि:-*
वृश्चिक राशि के जातकों को 'खैर या अनार' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*9. धनु राशि:-* 
धनु राशि के जातकों को 'आम, पीपल अथवा बरगद' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*10. मकर राशि:-*
मकर राशि के जातकों को 'शमी' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*11. कुंभ राशि:-*
कुंभ राशि के जातकों को 'शमी अथवा शीशम' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*12. मीन राशि:-*
मीन राशि के जातकों को 'केला अथवा आम' वृक्ष के पौधे का रोपण करके बड़े होने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।

*(समाप्त)*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 15 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
*2. 15 जुलाई के पंचांग मे "सावन शिवरात्रि पर भक्तो तथा कांवडियो द्वारा जलाभिषेक" विषय पर लेख।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*शुक्रवार,14.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- द्वादशी तिथि 7:17 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे।*
*नक्षत्र- रोहिणी ऩक्षत्र 10:27 pm तक*
*योग- गण्ड योग 8:28 am तक (अशुभ है)*
*करण- कौलव करण 6:47 am तक* 
*सूर्योदय- 5:32 am, सूर्यास्त 7:21 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 11:59 am से 12:54 pm*
*राहुकाल- 10:43 am से 12:27 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पश्चिम दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 14 (सायं. 7 तक), 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 15, 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 

*यमघण्टक योग:- 14 जुलाई 5:32 am से 14 जुलाई 10:27 pm तक, फिर 16 जून 3:07 pm से 17 जून 5:23 am तक* यह एक अशुभ योग हैं, यह कष्टदायक योग है, इसमे विशेष रूप से शुभ कार्य के लिए की जाने वाली यात्रा तथा बच्चो के शुभ कार्य न करे । परंतु इस कुयोग के साथ ही यदि कोई सर्वार्थ सिद्ध योग जैसा शुभ योग भी हो तो इस योग का दुष्प्रभाव जाता रहता है।
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 14 जुला०- प्रदोष व्रत। 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

12 जुलाई 2023

सोमवती अमावस्या, शुद्ध श्रावण अमावस्या, 17.07.2023,भाग-1


धारावाहिक लेख:- सोमवती अमावस्या, शुद्ध श्रावण अमावस्या, 17.07.2023,भाग-1

अमावस्या तिथि आरंभ- 16 जुलाई 10:08 pm
अमावस्या तिथि समाप्त- 17/18 जुलाई मध्यरात्रि 00:01 am


सनातन धर्म में सोमवती अमावस्‍या का विशेष महत्‍व है। यह एक वर्ष में दो से तीन बार पड़ती है। हिन्दु वर्ष (विक्रमी संवत 2080) की यह अंत‍िम सोमवती अमावस्‍या, उदया तिथि के अनुसार इस बार शुद्ध श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को 17 जुलाई 2023 सोमवार को पड़ रही है।

सोमवार से युक्त अमावस्या का शास्त्रों में विशेष माहात्म्य कहा गया है। स्कन्द पुराण के अनुसार सोमवार और अमावस्या का योग कभी-कभी होता है। इस दिन भगवान शिव के दर्शन करके पूजन आदि करने का विशेष महत्त्व होता है। विशेषकर सोमेश्वर महादेव की पूजार्चना करने से कोटि (करोड़ों) यज्ञों का फल प्राप्त होता है।

सोमवती अमावस्या को तीर्थ स्थान, जप, पाठ एवं ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, दक्षिणादि उल्लेखनीय सहित दान करना विशेष पुण्यप्रद माना गया है। पुरुषार्थ चिन्तामणि के अनुसार, यदि अमावस्या सोमवार या मंगलवार अथवा गुरुवार को हो तो उस योग के पर्व को पुष्कर योग कहते हैं। इन योगों का फल सूर्यग्रहणों में किए हुए दान-पुण्य से सौ गुणा अधिक होता है।

 स्नानदान आदि पुण्य कर्मों में मंगलवारी अमावस्या भी सोमवती अमावस्या के समान ही मनानी चाहिए। यदि मंगलवारी अमावस्या हो तो गंगा के स्नानमात्र से सहस्र गौओं के दान का फल प्राप्त होता है 

सोमवार से युक्त अमावस्या हो तो वह अनन्त फल देने वाली और पितृगणों को दिया हुआ श्राद्ध अक्षय होता है।

  अमावस्या के दिन ब्रह्माण्ड मे विशिष्ट प्रकार की तरंगों का निष्कासन होता है, जिससे विशिष्ट प्रकार के कार्यों का निष्पादन सफलतापूर्वक किया जा सकता है, जैसे पितरो की सदगति, पितृदोष निवारण, पिंड़दान, तर्पण, कालसर्प योग निवारण अनुष्ठान, पापो का क्षय करके पुण्य प्राप्त करना, स्नान-दान, जप-अनुष्ठान, सिद्धि प्राप्ति, विवाह में विलम्ब, सन्तान कष्ट आदि बाधाएं एवं कलिष्ट रोगों की शान्ति,मारण, मोह, अभिचारक कर्म तथा धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में आत्मशुद्धि, स्नानदान, जप पाठ आदि की दृष्टि से अमावस्या का विशेष महत्व होता है ।

चंद्रमा मन का स्वामी है। यह मनोबल बढ़ाने और पितरों का अनुग्रह प्राप्त कराने में सबसे ज्यादा सहायक होता है।  सूर्य की सहस्र किरणों में प्रमुख "अमा नाम की किरण", इस दिन चन्द्रमा में निवास करती है, अतः अमावस्या को इसलिए भी अक्षय फल देने वाली माना जाता है। 

महीने मे एक बार जब सूर्य तथा चंद्रमा एक ही राशि में इकट्ठे होते हैं, तब अमावस्या होती है, और वह तिथि सोमवार को हो, तो सोमवती अमावस्या का भी लाभ होता है। सोमवती अमावस्या को किए गए पूजा पाठ, अनुष्ठान विशेष रूप से पितरों के लिए प्रशस्त माने जाते हैं।

हिन्दू धर्म मे श्रावण अमावस्या तथा सोमवती अमावस्या के दिन किए गए पवित्र नदी मे स्नान अर्थात तीर्थ मे स्नान, भगवान भोलेनाथ की पूजा, दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले धार्मिक कर्मों जैसे तर्पण व श्राद्ध आदि पुण्य कर्म करने से सुख-समृद्धि, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी होती है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रावण अमावस्या पर पवित्र नदियों में देवी-देवताओं का निवास होता है। इसलिए इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों तथा सरोवरो में स्नान का विशेष महत्व माना गया है।

अमावस्या के दिन ब्रह्माण्ड मे विशिष्ट प्रकार की तरंगों का निष्कासन होता है, क्योंकि इस दिन सूर्य तथा चंद्र एक साथ में स्थित रहते हैं, इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है। जिससे विशिष्ट प्रकार के कार्यों का निष्पादन सफलता पूर्वक किया जा सकता है, जैसे पितरो की सदगति, पितृदोष निवारण, पिंड़दान, तर्पण, कालसर्प योग निवारण अनुष्ठान, पापो का क्षय करके पुण्य प्राप्त, स्नान-दान, जप-अनुष्ठान, सिद्धि प्राप्ति करने हेतू, मारण, मोह, अभिचारक कर्म आदि तंत्र सिद्धि करने का सर्वोत्तम दिन तथा समय होता है।


*श्रावण अमावस्या पर किए जाने वाले कार्य :-*
1. पुराणों के अनुसार अमावस्या के दिन स्नान-दान-पूजन-तर्पण करने की परंपरा है। वैसे तो इस दिन गंगा-स्नान का विशिष्ट महत्व माना गया है, परंतु जो लोग गंगा स्नान करने नहीं जा पाते, वे किसी भी नदी या सरोवर तट आदि में स्नान कर सकते हैं, अथवा स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करे।

2. पवित्र नदी,सरोवर अथवा केवल पवित्र जल से स्नान के उपरांत फाल्गुन मास के देवता शिव-पार्वती का पूजन आवश्यक है। इस दिन शिव गौरी की उपासना करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। 

सोमवती अमावस्या के दिन विवाहित स्त्रियां द्वारा पति की लंबी आयु के लिए व्रत भी रखा जाता हैं। इसमे विवाहित स्त्रियां व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चदंन इत्यादि से पूजा करके, वृक्ष के चारों ओर 108 बार कच्चा सूत का धागा लपेट कर परिक्रमा करती हैं। 

3. तत्पश्चात सूर्य देव को अर्ध्य प्रदान करे।

4. तत्पश्चात पीपल वृक्ष तथा तुलसा जी को श्रद्धापूर्वक जल से सींच कर ज्योत जलाकर पूजा करनी चाहिये। (पीपल के वृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है।) 

5. अमावस्या को पितृरो का दिन भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन अपने पूर्वजों को याद किया जाता है और उनके लिए पिंडदान, तर्पण तथा प्रार्थनाएं की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्वज धरती पर आकर अपने परिवार को आर्शीवाद देते हैं।

अतः श्रावण अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण आदि कर्म करनें के उपरांत जाने-अनजाने में जो गलती हो, उसके लिए पितरों से क्षमा मांगनी चाहिए।

6. इस प्रकार यह सब कार्य होने के उपरांत गाय, कुत्ता, कौआ तथा चींटियों को भोजन दे। इस दिन गरीबों को भोजन और कपड़े दान करने से विशेष लाभ मिलता है। 

7. संभव हो तो पूजा के बाद प्रत्येक वर्ष श्रावण अमावस्या पर कम से कम एक अथवा सामर्थ्यनुसार अधिक संख्या मे वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए।

8. इस प्रकार स्नान-पूजन, पितृ तर्पण के उपरांत ब्राह्मण भोजन तथा दक्षिणा करवाकर, तत्पश्चात गरीबों, लाचारो, अपाहिजो को भोजन को भोजन करवाना चाहिए।

9. तदोपरान्त ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को  श्रद्धा-भक्ति के साथ दान करना चाहिए, दान में गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, बिस्तर तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करनी चाहिये।

10. श्रावण अमावस्या के दिन प्रदोषकाल (सूर्यास्त के उपरांत) में मंदिर, चौराहे, उपवन, नदी-जलस्तोत्र के तट इत्यादि मे दीपदान अवश्य करना चाहिए।
 
11. श्रावण अमावस्या के दिन सूरज ढलने के बाद खीर बनाएं और उसका भोग चंद्रदेव को लगाकर स्वयं ग्रहण करे।

12. श्रावण अमावस्या होने के कारण इस दिन पितरो को मोक्ष प्राप्ति के लिए पितृदोष निवारण अनुष्ठान तथा कालसर्पयोग दोष से मुक्ति पाने के लिये कालसर्प योग अनुष्ठान करने का अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है।


*अमावस्या को निषेध कार्य:-*
1.अमावस्या को कोई भी शुभ मागंलिक कार्य नहीं करना चाहिए ।          

2. अमावस्या पर संयम बरतना चाहिए, अमावस्या को सहवास करने से धन की देवी कुपित होती है, जिससे मनुष्य ऋणी होते है। गरुण पुराण के अनुसार, अमावस्या पर यौन संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान को आजीवन सुख नहीं मिलता है ।

3. अमावस्या के दिन किसी दूसरे का अन्न खाने से एक महीने के साधन-भजन का पुण्य खिलाने वाले व्यक्ति को मिल जाता है l अतः अमावस्या के दिन अपने घर के सिवाय किसी का भी अन्न ग्रहण नही करना चाहिए ।

4. अमावस्या के दिन बाल कटवाना, क्षौर कर्म इत्यादि वर्जित हैं ।

5. अमावस्या पर घर में पितरों की कृपा पाने के लिए घर में कलह-क्लेश बिल्कुल नहीं होना चाहिए । लड़ाई-झगड़े और वाद-विवाद से बचना चाहिए । इस दिन अपशब्द, अनर्गल प्रलाप तथा कड़वे वचन तो बिल्कुल नहीं बोलने चाहिए।

*(क्रमशः)*
*लेख के दूसरे भाग मे कल "हरियाली अमावस्या के विषय मे लेख"।*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 15 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
*2. 12 जुलाई के पंचांग मे "सोमवती अमावस्या" पर लेख।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*बुधवार,12.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- दशमी तिथि 5:59 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मेष राशि मे 13 जुलाई 1:58 am तक तदोपरान्त वृष राशि।*
*नक्षत्र- भरणी ऩक्षत्र 7:43 pm तक*
*योग- धृति योग 9:40 am तक (अशुभ है)*
*करण- वणिज करण 5:57 am तक* 
*सूर्योदय- 5:31 am, सूर्यास्त 7:22 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- कोई नही*
*राहुकाल- 12:27 pm से 2:10 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- उत्तर दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 14 (सायं. 7 तक), 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 12, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 

*भद्रा:-*  12 जुलाई 6:03 am से 12 जुलाई 6 pm तक (भद्रा मे मुण्डन, गृहारंभ, गृहप्रवेश, विवाह, रक्षाबंधन आदि शुभ काम नही करने चाहिये , लेकिन भद्रा मे स्त्री प्रसंग, यज्ञ, तीर्थस्नान, आपरेशन, मुकद्दमा, आग लगाना, काटना, जानवर संबंधी काम किए जा सकतें है)
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
13 जुला०- कामिका एकादशी। 14 जुला०- प्रदोष व्रत। 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी  से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य  मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

कामदा एकादशी व्रत 19-04-2024

☀️ *लेख:- कामदा एकादशी, भाग-1 (19.04.2024)* *एकादशी तिथि आरंभ:- 18 अप्रैल 5:31 pm* *एकादशी तिथि समाप्त:- 19 अप्रैल 8:04 pm* *काम...