14 जनवरी 2024

धारावाहिक लेख:- मकरसक्रांन्ति, 15.01. 2024, भाग-2



*धारावाहिक लेख:- मकरसक्रांन्ति, 15.01. 2024, भाग-2*

*मकरसक्रांन्ति, 15.01.2024*
*सूर्य का मकर राशि प्रवेश-14/15 जन० मध्यरात्रि 2:43 am* 
*मकर संक्रान्ति पुण्यकाल- 15 जनवरी, 7:15 am से 5:46 pm*
*सक्रांति महापुण्यकाल- 15 जनवरी 7:15 am से 9 am तक*

*(विशेष:- पुण्यकाल का तात्पर्य है, स्नान-दान, पूजा-पाठ, तर्पण इत्यादि पुण्य कर्मकरने का समय।)*

विभिन्न हिन्दु मान्यता के अनुसार वर्ष 2024 मे मकर सक्रांति का त्यौहार, दिनांक 15 जनवरी को मनाया जायेगा। 

*गतांक से आगे................*

*क्या होती है सक्रांति :-*
 सूर्य साल के बारह महीनो मे प्रत्येक माह एक एक राशि मे भ्रमण करते है, और प्रत्येक अंग्रेज़ी माह के मध्य 15 तारीख़ के लगभग एक राशि से दूसरी राशि मे सूर्य के प्रवेश करने के समय को ही सक्रांति कहते है । 

*क्यो शुभ होती है मकर सक्रांति:-*
 मघ्य दिसम्बर से 13 जनवरी तक सूर्य धनु राशि मे होते है, धनु राशि मे सूर्य के होने से "पौष का महीना" अर्थात "मलमास" होता है, जिसमे सभी तरह के ब्याह-शादी आदि समस्त शुभ कार्य वर्जित होते है, और जब सूर्य इसी धनु राशि से निकल कर मकर राशि मे प्रवेश करते है तो "उत्तरायण अर्थात शुभ मांगलिक" कार्यो की शुरुआत का समय आंरभ हो जाता है । छह माह के काल "उतरायण" आंरभ होने के दिन को ही मकरसंक्रान्ति पर्व के रुप मे मनाया जाता है ।

दरअसल सूर्य वर्ष के बारह महीनो मे प्रत्येक माह अलग-२, बारह राशियो मे भ्रमण करते है:-

*1. सूर्य का दक्षिणायन*
मध्य जुलाई से लेकर 13 जनवरी तक के इस समय यानि, सूर्य के कर्क राशि से धनु राशि तक के भ्रमण के समय को दक्षिणायन कहते है।
 
दक्षिणायन सूर्य के समय सूर्य मे बल अर्थात तेज नही होता। इस वजह से छः माह के इस काल को मुर्हूत, आदि शुभ तथा मांगलिक कार्यो के लिए अच्छा नही माना जाता ।

दक्षिणायन काल में सूर्य दक्षिण दिशा की ओर झुकाव के साथ गति करने लगता है। मान्यता है कि दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि है।
दक्षिणायन में रातें लंबी हो जाती है। 

दक्षिणायन व्रत और उपवासों का समय होता है। इस दिन कई शुभ और मांगलिक कार्य का करना निषेध होता है। सूर्य का दक्षिणायन होना कामनाओं और भोग की वृद्धि को दर्शाता है, इसलिए इस समय में किए गए कार्य जैसे पूजा, व्रत आदि से दुख और रोग दूर होते हैं।

*2. सूर्य का उत्तरायण*
"14 जनवरी मकर संक्रान्ति" से लेकर "मिथुन संक्रान्ति- यानि मध्य जुलाई", तक के काल को सूर्य का उतरायण काल माना जाता है । जिसे शुभ काल कहते है । सूर्य के इस उत्तरायण काल को शुभ तथा मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।

मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण में उत्तरायण के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि आध्यात्मिक प्रगति और ईश्वर की पूजा-अर्चना के लिए उत्तरायण काल विशेष फलदायी होता है।

 इस प्रकार सूर्यदेव की यह संक्रमण क्रिया छह-२  महीने की अवधि की होती है, अर्थात दोनो अयन 6-6 महीने के होते हैं।

इस प्रकार मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य छः महीने तक दक्षिणायन मे होने से जो शुभ कार्य प्रतिबन्धित होते है, वह सब कार्य मकर सक्रांति (यानि सूर्य के उतरायण) होने से खुल जाते है, *इसी खुशी को मानने का पर्व है मकर सक्रांति।* 

इस दिन सूर्य के उत्तरायण मे होने से दिन बडे तथा राते छोटी होना शुरू हो जाती है ।

 मकरसंक्रान्ति वास्तव मे एक ऋतुपर्व है, इस दिन से भगवान सूर्य के उतरायण होने से देवताओ का ब्रह्ममुहूर्त आरम्भ हो जाता है, अर्थात इन छः महीनो को साधनाओ और परा-अपराविद्याओ की प्राप्ति का भी काल माना जाता है ।

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी  गृृहनिर्माण, देवप्रतिष्ठा, यज्ञ, आदि समस्त शुभकार्य और मुर्हूत उत्तरायण काल मे ही होने चाहिए । यहां तक की विभिन्न शुभकार्यो के अतिरिक्त मृृत्यु के लिए भी "उत्तरायण काल" को ही शुभ माना गया है, इन महीनो मे मृृत्यु होने से यमलोक अर्थात नरक जाने की संभावना कम रहती है ।

सूर्य का उत्तरायण प्रवेश जन-जन को प्राणहारी सर्दी की समाप्ति एवं वसन्त का शुभागमन का संदेश होता है । इस शुभ दिन को देश भर के विभिन्न प्रान्तो मे भिन्न-२ नामो से मनाया जाता है, दक्षिण भारत मे इसे पोगल के नाम से मनाया जाता है । 

मकरसंक्रान्ति की शुभता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हिन्दु धर्म मे काले रंग को अशुभ  माना गया है, क्योकि काले रंग मे तमोगुणी तंरगो को ग्रहण करने की अधिक क्षमता होती है, परन्तु मकरसंक्रान्ति के दिन वातावरण मे रज तथा सत्वतंरगो की अधिकता होती है, इसीलिए मकरसंक्रान्ति के दिन काले रंग के वस्त्रो को उपयोग मे लाने की अनुमति सनातन धर्म ने दी है।

 शास्त्रो मे उल्लेख है की भगवान विष्णु भी मकर संक्रान्ति तथा माघमास की शुभता एवम् इनके स्नान के विषय मे कहते है की भगवान की भक्ति-पूजा करो या न करो, लेकिन यदि "मकरसंक्रान्ति स्नान" या "माघमास" के स्नान करते हो, तो अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति अवश्य ही होती है ।

 सूर्य की सातवीं किरण भारत वर्ष में आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देने वाली है। सातवीं किरण का चमत्कारी प्रभाव भारत वर्ष में गंगा-यमुना के जल मे अधिक समय तक रहता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला अर्थात मकर संक्रांति या पूर्ण कुंभ तथा अर्द्धकुंभ के विशेष उत्सव का आयोजन होता है।

ब्रह्मर्षि भृगु जी कहते है, संक्रान्ति एवं माघ के स्नान से सब पाप नष्ट हो जाते है, यह सब व्रतो से बढ़कर है, तथा यह सब प्रकार के दानो का फल प्रदान करने वाला है, जिनके मन मे स्वर्गलोक भोगने की अभिलाषा हो, आयु, आरोग्यता, रुप, सौभाग्य, एवं उत्तम गुणो मे जिनकी रुचि हो वह ,तथा वह व्यक्ति जो दरिद्रता, पाप और दुर्भाग्य रुपी  कीचड़ को धोना चाहते है, उन्हे "मकरसंक्रान्ति तथा माघमास" के स्नान अवश्य करने चाहिए ।

*मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व:-*
*1. सूर्यदेव का पुत्र शनि की मकर राशि मे प्रवेश का पर्व:-*
शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, और इस दिन सूर्य मकर राशि मे प्रवेश करते है, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है, ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। एक मास मकर राशि मे गोचर करने के उपरांत कुंभ राशि मे प्रवेश करते है। 

*2. मकरसंक्रांति के दिन भगीरथ ऋषि द्वारा पूर्वजों का उद्धार:-*
मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथ ऋषि ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इसी दिन गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई समुद्र में जाकर मिल गई थी।

 कपिल मुनि ने अपने आश्रम मे गंगा मां के प्रवेश करते हुए प्रसन्नता से आह्लादित होते हुए, वरदान देते हुए कहा, 'मां गंगे त्रिकाल तक जन-जन का पापहरण करेंगी और भक्तजनों की सात पीढ़ियों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करेंगी। गंगा जल का स्पर्श, पान, स्नान और दर्शन सभी पुण्यदायक फल प्रदान करेगा।" 

*3. भीष्म पितामह की इच्छा मृत्यु*
मकर संक्रांति का महाभारत में भी वर्णन किया गया है, पुराणों में कहा गया है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है, इसकी एक कथा भीष्म पितामह के जीवन से जुड़ी हुई है। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामाह ने गंगा के तट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का छब्बीस दिनों तक इंतजार किया था। इच्छा मृत्यु का वरदान मिलने के कारण वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक जीवित रहे।

*4. भगवान विष्णु द्वारा असुरों का संहार:-*
मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन माना जाता है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।

*5. यशोदा मैय्या:-*
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यशोदा मैय्या ने इस दिन श्रीकृष्ण के जन्म के लिए यह सक्रांति का व्रत रखा था, तब उसी दिन से मकर संक्रान्ति के व्रत की परिपाटी चली आ रही है।

*6. फसलों की कटाई का त्यौहार:-*
नई फसल और नई ऋतु के आगमन के तौर पर भी मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाती है। पंजाब, यूपी, बिहार समेत तमिलनाडु में यह वक्त नई फसल काटने का होता है, इसलिए किसान मकर संक्रांति को आभार दिवस के रूप में मनाते हैं।

7. संक्रांति को देवता माना गया है। शास्त्रो मे वर्णन है कि संक्रांति ने ही संकरासुर नामक दानव का वध किया था।
 
*(क्रमशः)*
*कल लेख के तीसरे तथा अंतिम भाग मे मकर सक्रांति का देश-समाज तथा विभिन्न रिशियो पर फल तथा मकर सक्रांति के पुण्य कर्म तथा उपाय*
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*आगामी लेख:-*
*1. 12 जनवरी के पंचांग मे "मकर सक्रांति पर्व" विषय पर धारावाहिक लेख।*
*2. 15 जनवरी के पंचांग मे "उत्तरायण/दक्षिणायन" विषय पर लेख।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*शनिवार, 13.01.2024*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- उत्तरायण, दक्षिण गोल*
*ऋतुः- शिशिर ऋतुः।*
*मास:- पौष।*
*पक्ष- शुक्ल पक्ष।*
*तिथि- द्वितीया तिथि 11:11 am तक।*
*नक्षत्र- श्रवण नक्षत्र 12:49 pm तक*
*योग- वज्र योग 10:14 am तक* (अशुभ है)*
*करण- कौलव करण 11:11 am तक* 
*चंद्रराशि- चंद्र मकर राशि मे 11:35 pm तक तदाेपरान्त कुंभ राशि।*
*सूर्योदय- 7:15 am, सूर्यास्त 5:44 pm*
*अभिजित् नक्षत्र-12:09 pm से 12:51 pm तक*
*राहुकाल- 9:52 am से 11:11 am तक* (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पूर्व दिशा।*

*जनवरी शुभ दिन:-* 15, 17, 18 (सवेरे 9 उपरांत), 19, 21 (सवेरे 7 तक), 22, 23 (सवेरे 8 तक), 24, 25 (सवेरे 11 उपरांत), 26, 27, 28 (सायंकाल 5 तक), 30, 31.
*अशुभ दिन:-* 13, 14, 16, 20, 29.

*पंचक प्रारंभ:- 13 जन० 11:35 pm से 18 जन० 3:34 am तक*  पंचक नक्षत्रों  मे निम्नलिखित काम नही करने चाहिए, 1.छत बनाना या स्तंभ बनाना (lantern  or Pillar) 2.लकडी  या  तिनके तोड़ना , 3.चूल्हा लेना या बनाना, 4. दाह संस्कार करना (cremation) 5.पंलग चारपाई, खाट , चटाई  बुनना  या बनाना 6.बैठक का सोफा या गद्दियाँ बनाना। 7. लकड़ी, तांबा, पीतल को जमा करना ।(इन कामो के सिवा अन्य सभी शुभ काम पंचको मे किए जा सकते है।

*सर्वार्थ सिद्ध योग:- 12 जन० 3:18 pm से 13 जन० 12:50 pm तक*  (यह एक शुभयोग है, इसमे कोई व्यापारिक या कि राजकीय अनुबन्ध (कान्ट्रेक्ट) करना, परीक्षा, नौकरी अथवा चुनाव आदि के लिए आवेदन करना, क्रय-विक्रय करना, यात्रा या मुकद्दमा करना, भूमि , सवारी, वस्त्र आभूषणादि का क्रय करने के लिए शीघ्रतावश गुरु-शुक्रास्त, अधिमास एवं वेधादि का विचार सम्भव न हो, तो ये सर्वार्थसिद्धि योग ग्रहण किए जा सकते हैं।
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*              
15 जन०- पोंगल/उत्तरायण/मकर संक्रांति (संक्राति पुण्यकाल- 15 जन० 9:07 am तक) 17 जन०- गुरू गोबिन्द सिंह जयंती/मार्तण्ड सप्तमी। 21 जन०- पौष पुत्रदा एकादशी। 23 जन०- प्रदोष व्रत। 25 जन०- पौष पूर्णिमा व्रत। 29 जन०- संकष्टी चतुर्थी।   
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*विशेष:- जो व्यक्ति online परामर्श लेना चाहते हो वह paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9129998000 📞
9648023364 🪀

11 जनवरी 2024

मकरसक्रांन्ति, 15-01-2024, भाग-1


धारावाहिक लेख:- मकरसक्रांन्ति, 15.01. 2024, भाग-1

मकरसक्रांन्ति, 15.01.2024
सूर्य का मकर राशि प्रवेश-14/15 जन० मध्यरात्रि 2:43 am
मकर संक्रान्ति पुण्यकाल- 15 जनवरी, 7:15 am से 5:46 pm
सक्रांति महापुण्यकाल- 15 जनवरी 7:15 am से 9:07 am तक

(विशेष:- पुण्यकाल का तात्पर्य है, स्नान-दान, पूजा-पाठ, तर्पण इत्यादि पुण्य कर्मकरने का समय।)

विभिन्न हिन्दु मान्यता के अनुसार वर्ष 2024 मे मकर सक्रांति का त्यौहार, दिनांक 15 जनवरी को मनाया जायेगा। 

मकर सक्रांति 2024 एक विवेचना
मकर संक्रांति का त्योहार प्रतिवर्ष सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर (14 जनवरी) को मनाया जाता है। परन्तु गत कुछ वर्षों से मकर संक्रांति 15 तारीख को मनाई जाती है, तथा ठीक इसी प्रकार से सक्रान्ति के पुण्यकाल को लेकर भी भ्रम की सी स्थिति होने लगी है। वर्ष 2024 मे  नियमो के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल और तिथि-मुहूर्त इस प्रकार से रहेगा। 

खगोलीय गणना के अनुसार, सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का समय प्रतिवर्ष "लगभग 20 मिनट" तक बढ़ जाता है। इसलिए लगभग हरेक 72 साल के बाद "एक दिन के अंतर" पर सूर्य मकर राशि में आता है। नीचे दर्शाई गई तालिका के अनुसार इसे समझना सरल रहेगा-

मकर संक्रांति, निरयण सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश है। विभिन्न शताब्दियो में यह विभिन्न तारीखो पर थी, तथा भविष्य मे भी निम्नलिखित प्रकार से होगी-
16-17 वी सदी मे 9, 10 जनवरी।
17-18 वी सदी मे 11, 12 जनवरी।
18-19 वी सदी मे 13,14 जनवरी। 
19-20 वी सदी मे 14, 15 जनवरी। 
21-22 वि सदी मे 15, 16 जनवरी को होगी।

 भारतीय 5000 वर्ष प्राचीन त्योहारो मे केवल यही त्यौहार सौर चक्र अनुसार मनाया जाता है।

(उदाहरण- मुगल काल में अकबर के शासन काल (1556- 1605 ई.) के दौरान मकर संक्रांति 10 जनवरी को मनाई जाती थी। तब से अब तक 4 दिन का अंतर आ गया है। अतः अब सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय 14 और 15 के बीच में होने लगा है।)

साल 2012 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को हुआ था इसलिए मकर संक्रांति इस दिन मनाई गई थी। इस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई गयी ऐसी गणना कहती है। इस प्रकार से भविष्य मे यानि आज से लगभग पांच हजार साल बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनाई जाने लगेगी। 

वर्तमान वर्ष 2024 मे मकर सक्रांति हेतु सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश 14/15 जनवरी की मध्यरात्रि 2:43 am पर होगा, तो ऐसे मे मकर सक्रांति 15 जनवरी मनाना उचित रहेगा।

(क्रमशः)
लेख के द्वितीय भाग मे कल मकर सक्रांति के विषय मे विस्तार सहित विवरण।
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आगामी लेख:-
1. 12 जनवरी के पंचांग मे "मकर सक्रांति पर्व" विषय पर धारावाहिक लेख।
2. 15 जनवरी के पंचांग मे "उत्तरायण/दक्षिणायन" विषय पर लेख।
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*शुक्रवार, 12.01.2024*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- उत्तरायण, दक्षिण गोल*
*ऋतुः- शिशिर ऋतुः।*
*मास:- पौष।*
*पक्ष- शुक्ल पक्ष।*
*तिथि- प्रतिपदा तिथि 2:23 pm तक।*
*नक्षत्र- उ०षाढा नक्षत्र 3:18 pm तक*
*योग- हर्ष योग 2:05 pm तक* (शुभ है)*
*करण- बव करण 2:23 pm तक* 
*चंद्रराशि- चंद्र मकर राशि मे।*
*सूर्योदय- 7:15 am, सूर्यास्त 5:43 pm*
*अभिजित् नक्षत्र-12:08 pm से 12:50 pm तक*
*राहुकाल- 11:11 am से 12:29 pm तक* (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पश्चिम दिशा।*

जनवरी शुभ दिन:- 15, 17, 18 (सवेरे 9 उपरांत), 19, 21 (सवेरे 7 तक), 22, 23 (सवेरे 8 तक), 24, 25 (सवेरे 11 उपरांत), 26, 27, 28 (सायंकाल 5 तक), 30, 31.
अशुभ दिन:- 12, 13, 14, 16, 20, 29.

*शसर्वार्थ सिद्ध योग:- 12 जन० 3:18 pm से 13 जन० 12:50 pm तक (यह एक शुभयोग है, इसमे कोई व्यापारिक या कि राजकीय अनुबन्ध (कान्ट्रेक्ट) करना, परीक्षा, नौकरी अथवा चुनाव आदि के लिए आवेदन करना, क्रय-विक्रय करना, यात्रा या मुकद्दमा करना, भूमि , सवारी, वस्त्र आभूषणादि का क्रय करने के लिए शीघ्रतावश गुरु-शुक्रास्त, अधिमास एवं वेधादि का विचार सम्भव न हो, तो ये सर्वार्थसिद्धि योग ग्रहण किए जा सकते हैं।
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आगामी व्रत तथा त्यौहार:-            
15 जन०- पोंगल/उत्तरायण/मकर संक्रांति (संक्राति पुण्यकाल- 15 जन० 9:07 am तक) 17 जन०- गुरू गोबिन्द सिंह जयंती/मार्तण्ड सप्तमी। 21 जन०- पौष पुत्रदा एकादशी। 23 जन०- प्रदोष व्रत। 25 जन०- पौष पूर्णिमा व्रत। 29 जन०- संकष्टी चतुर्थी।   
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विशेष:- जो व्यक्ति online परामर्श लेना चाहते हो वह paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है
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आपका दिन मंगलमय हो 💐💐💐
आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश
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18 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -6)


धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -6)

*पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........

सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार*
सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)

*सावन सोमवार:-*
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*भगवान भोलेनाथ की प्रसन्नता तथा कृपा प्राप्ति हेतु कुछ लघु महामंत्र:-*

निम्नलिखित मंत्रों मे से किसी भी मंत्र का  प्रतिदिन कम से कम तीन माला का जाप रूद्राक्ष की माला से करने पर मनोकामना पूर्ण होती है ।

1.*ऊर्ध्व भू फट् ।*

2. *नमः शिवाय ।*

3. *ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय ।*

4.* ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा ।*

5. *इं क्षं मं औं अं ।*

6. *प्रौं ह्रीं ठः ।*

7. *नमो नीलकण्ठाय ।*

8. *ॐ पार्वतीपतये नमः ।*

9. *ॐ पशुपतये नम:*

*पौराणिक मंत्र:-*
*ॐ मृत्युंजयमहादेवं त्राहि मां शरणागतम् ।*
*जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै:॥*

*समय मंत्र:-*
*ॐ हौं जू स: मृत्युंजयाय नम:॥*

॥ *बाणलिङ्गकवचम्*॥ 

अस्य बाणलिङ्ग कवचस्य संहारभैरवऋषिर्गायत्रीच्छन्दः, हौं बीजं, हूं शक्तिः, नमः कीलकं, श्रीबाणलिङ्ग सदाशिवो देवता, ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ 

*ॐ कारो मे शिरः पातु नमः पातु ललाटकम् ।*
*शिवस्य कण्ठदेशं मे वक्षोदेशं षडक्षरम् ॥ १॥*

*बाणेश्वरः कटीं पातु द्वावूरू चन्द्रशेखरः ।*
*पादौ विश्वेश्वरः साक्षात् सर्वाङ्गं लिङ्गरूपधृक्॥२॥*

*इतिदं कवचं पूर्व्वं बाणलिङ्गस्य कान्ते पठति यदि मनुष्यः प्राञ्जलिः शुद्धचित्तः । व्रजति शिवसमीपं रोगोशोकप्रमुक्तो बहुधनसुखभोगी बाणलिङ्ग प्रसादतः॥३॥*

*।।इति बाणलिङ्ग कवचं समाप्तम् ॥*

आशुतोष भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिल्व पत्र अर्पित करते हुए या उनके ऊपर जलधारा (अभिषेक) करते हुए बाणलिङ्ग कवचं का पाठ करे ।

*(क्रमंशः)*
*लेख के सातवे भाग मे कल "भगवान शिव के निमित्त व्रत*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*बुधवार,19.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम अधिक श्रावण मास।*
*पक्ष- शुक्ल पक्ष ।*
*तिथि- द्वितीया तिथि 20 जुलाई 4:30 am तक*
*चंद्रराशि- चंद्र कर्क राशि मे।*
*नक्षत्र- पुष्य ऩक्षत्र 7:58 am तक*
*योग- वज्र योग 10:26 am तक (अशुभ है)*
*करण- बालव करण 3:18 pm तक* 
*सूर्योदय- 5:35 am, सूर्यास्त 7:20 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- कोई नही*
*राहुकाल- 12:27 pm से 2:10 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- उत्तर दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 20, 27, 29, 30, 31. 

*गण्ड मूल आरम्भ:- 19 जुलाई अश्लेषा नक्षत्र, 7:58 am से 21 जुलाई को मघा नक्षत्र 1:58 pm तक गंडमूल रहेगें।*  गंडमूल नक्षत्रों मे जन्म लेने वाले बच्चो का मूलशांति पूजन आवश्यक है।
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत। 1 अग०- सत्यनारायण/ पूर्णिमा व्रत। 4 अग०- संकष्टी चतुर्थी। 12 अग०- परम एकादशी। 13 अग०- प्रदोष व्रत। 14 अग०- मासिक शिवरात्रि। 16 अग०- अमावस्या। 17 अग०- सिंह संक्रांति -पुण्यकाल- 7:08 am के बाद सारा दिन)। 19 अग०- हरियाली तीज। 21 अग०- नाग पंचमी।22 अग०- कल्कि जयंती। 25 अग०- वरलक्ष्मी व्रत। 27 अग०- श्रावण पुत्रदा एकादशी। 28 अग०- प्रदोष व्रत। 29 मंगलवार ओणम। 30 अग०- रक्षा बंधन। 31 अग०- श्रावण पूर्णिमा व्रत/गायत्री जयंती।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी  से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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आपका दिन मंगलमय हो 💐💐💐
आचार्य मोरध्वज शर्मा 
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश 
9648023364
9129998000

17 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -5)


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*धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -5)*

*पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........*

*सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार*
*सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)*

*सावन सोमवार:-*
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*सावन मास मे शिव पूजन द्वारा कष्ट निवारण हेतु उपाय:-*

1. जिन व्यक्तियों कि कुंडली मे साढेसाती, दूषित चंद्र की दशा-महादशा, अमावस्या-पूर्णिमा या ग्रहण का जन्म हो तो वह जातक व्रत के साथ शिव अष्टोतरी मंत्र का जाप करे।

*शिव अष्टोतरी मंत्र :-* 

  *॥ ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं ॥*

2. मानसिक रोग ( डिप्रेशन, संवेदनशील स्वभाव, वहम ), क्षय रोग, दमा-श्वास रोग, साइनस, मिर्गी तथा किडनी रोगो से पीडित व्यकित या महावारी या स्त्री रोग से पीडित नारियाँ सावन के व्रत या पूजन के साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करे तो निश्चित रूप से लाभ प्राप्त होगा ।

*रूद्र गायत्री मंत्र :-*
 *ॐ पुरुषस्य विद्महे, सहस्राक्षस्य धीमहि ।*
      *तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥*

3. जो लोग मारकेष या लम्बी बीमारी से ग्रस्त हो वह सावन मास मे पूजन के साथ प्रतिदिन 11माला लधुमृत्युंजय मंत्र के साथ ॥ नमः शिवाय ॥ मंत्र का जाप करे तो केवल एक महीने के जाप के प्रभाव से मृत्युशैया से भी उठ खडे होगे ।

*लघुमृत्युंजय मंत्र :-*  
*॥ ॐ ह्रौं जू  सः ॥*

4. वास्तु शुद्धि अथवा गृह शुद्धि के लिए सावन मास मे अपनी क्षमतानुसार एक बार, पांच बार, सावन के चारो सोमवार या सावन माह मे लगातार रूद्राभिषेक करवाये ।

5. *भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र:-*
*। ॐ नमः शिवाय ।* 

यह अमोघ एवं मोक्षदायी है, पंचाक्षर स्तोत्र अत्यंत पुण्यदायी व मनोरथो को पूर्ण करने वाला, समस्त भय को दूर करने वाला तथा मोक्ष प्रदान करने वाला स्तोत्र है ।

6. *शिव पंचाक्षर स्त्रोत:-*
*नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय ।*
*नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे "न" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे महेश्वर! आप नागराज को हार स्वरूप धारण करने वाले हैं। हे (तीननेत्रों वाले) त्रिलोचन आप भस्म से अलंकृत, नित्य (अनादि एवं अनंत) एवं शुद्ध हैं। अम्बर को वस्त्र सामान धारण करने वाले दिग्मबर शिव, आपके न् अक्षर द्वारा जाने वाले स्वरूप को नमस्कार ।

*मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।*
*मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे "म" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- चन्दन से अलंकृत, एवं गंगा की धारा द्वारा शोभायमान नन्दीश्वर एवं प्रमथनाथ के स्वामी महेश्वर आप सदामन्दार पर्वत एवं बहुदा अन्य स्रोतों से प्राप्त्य पुष्पों द्वारा पुजित हैं। हे म् स्वरूप धारी शिव, आपको नमन है।

*शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।*
*श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै"शि" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे धर्म ध्वज धारी, नीलकण्ठ, शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले महाप्रभु, आपने ही दक्ष के दम्भ यज्ञ का विनाश किया था। माँ गौरी केकमल मुख को सूर्य सामान तेज प्रदान करने वाले शिव, आपको नमस्कार है।

*वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय ।*
*चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै"व" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- देवगणो एवं वशिष्ठ्ठ , अगस्त्य, गौतम आदि मुनियों द्वार पुजित देवाधिदेव! सूर्य, चन्द्रमा एवं अग्नि आपके तीन नेत्र सामन हैं। हे शिव आपके व् अक्षर द्वारा विदित स्वरूप कोअ नमस्कार है।

*यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय ।*
*दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवायः॥*

अर्थ :- हे यज्ञस्वरूप, जटाधारी शिव आप आदि, मध्य एवं अंत रहित सनातन हैं। हे दिव्य अम्बर धारी शिव आपके शि अक्षर द्वारा जाने जाने वाले स्वरूप को नमस्कारा है।

*पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ ।*
*शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥*

अर्थ :- जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मंत्र का नित्य ध्यान करता है वह शिव के पुुण्य लोक को प्राप्त करता है तथा शिव के साथ सुख पुर्वक निवास करता है।

7. विषम काल में यदि कोई गंभीर या लाइलाज शारीरिक कष्ट, मारकेष या गहरा संकट आ जाये निम्नलिखित मंत्र का सवा लाख जप बड़ी से बड़ी समस्या, विघ्न या शारीरिक कष्ट को टाल देता है।

*महामंत्र:-*
*ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ*

*(क्रमंशः)*
*लेख के छठे भाग मे कल "भगवान भोलेनाथ की प्रसन्नता तथा कृपा प्राप्ति हेतु कुछ लघु महामंत्र*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
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☀️

*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*सोमवार,17.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- अमावस्या तिथि 18 जुलाई 00:01 am तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मिथुन राशि मे 10:32 am तक तदोपरान्त कर्क राशि।*
*नक्षत्र- पुनर्वसु ऩक्षत्र 18 जुलाई 5:11 am तक*
*योग- व्याघात योग 8:58 am तक (अशुभ है)*
*करण- चतुष्पद करण 11:02 am तक* 
*सूर्योदय- 5:34 am, सूर्यास्त 7:20 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 12 pm से 12:55 pm*
*राहुकाल- 7:17 am से 9:01 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पूर्व दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी  से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
आचार्य मोरध्वज शर्मा 
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश।।
9648023364
9129998000

15 जुलाई 2023

भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -4)


धारावाहिक लेख:- भगवान शिव, सावन मास पूजन तथा व्रत विधि (भाग -4)


पूर्व मे प्रकाशित भाग के अंश........

सावन का पहला दिन- 4 जुलाई 2023, मंगलवार
सावन का अंतिम दिन - 31 अगस्त (पूर्णिमा)

सावन शिवरात्रि जलाभिषेक- 15/16 जुलाई।
सावन शिवरात्रि:- 15 जुलाई

सावन सोमवार:-
सावन का पहला सोमवार: 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार: 24 जुलाई (अधिकमास)
सावन का चौथा सोमवार: 31 जुलाई (अधिकमास)
सावन का पांचवा सोमवार: 7 अगस्त (अधिकमास)
सावन का छठवां सोमवार: 14 अगस्त (अधिकमास)
सावन का सातवां सोमवार: 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार: 28 अगस्त

चान्द्र मास गणना अनुसार वर्ष 2023 मे अधिक मास होने के कारण श्रावण अर्थात सावन मास लगभग दो महीने (59 दिन) का रहेगा। सावन मास का आंरभ दिनांक 4 जुलाई 2023 को होगा, 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) तक की लगभग दो महीने की अवधि तक सावन मास रहेगा।

जिसमे 4 जुलाई से 17 जुलाई तक के सावन कृष्णपक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
तदोपरान्त 18 जुलाई से 16 अगस्त तक  अधिक मास रहेगा। 
इसके उपरांत 17 अगस्त से 31 अगस्त तक फिर से सावन शुक्ल पक्ष की अवधि को शुद्ध सावन माना जायेगा। 
इस तरह 2023 मे सावन 59 दिनों का होगा। ये दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद मे निर्मित हो रहा है।

*गतांक से आगे.............*

*सावन माह मे भगवान शिव की अराधना के द्वारा मनोकामना पूर्ण करने के उपाय:-*

1. धन अथवा लक्ष्मी तथा जीवन मे शांति पाने के लिए बेलपत्र या दूब से शिवपूजन करे।

2. आयु तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए चम्पा के फूलो से, विद्या पाने के लिए सावन मास मे मल्लिका या चमेली के फूलो से "श्री हरि" की पूजा करे।
  
3. संतान या पुत्र की इच्छा करने वाले मनुष्य सावन मास मे कटेरी के पत्तों से शिव तथा विष्णु पूजन करे।

4. बुरे अर्थात अशुभ स्वप्नों से परेशान हो तो मुक्ति हेतु  धान्य यानि अनाज से शिव पूजन करे।

5. बिल्वपत्रों पर चंदन से "ऊँ नमः शिवाय" लिखकर उन पत्तों की माला बनाकर भोलेनाथ को अर्पित करें। बिल्वपत्र कहीं से भी फटे हुए यानि खण्डित नही होंने चाहिए।
 
(शास्त्रों मे इन फूलो या पत्तों को अर्पण करने की संख्या एक लाख कही गई है, जोकि अब संभव नही है अतः इन्हें दस की संख्या मे अर्पित करे।)

6. रोगों से परेशान हैं अौर दवाईयां लेने के बाद भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा हो तो, जल में दूध अौर काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करने पर सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है, तथा रोग मुक्ति हेतु कुशा मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने से किसी भी प्रकार की व्याधि अर्थात रोग से मुक्ति मिलती है।
 
7. जल में केसर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएं दूर होती है। इसके साथ ही गृहस्थ जीवन में आ रही परेशानियां भी दूर हो जाती है। 
 
8. कुंडली में शनि दोषपूर्ण है अौर पीड़ा दे रहा है तो जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से शीघ्र राहत मिलेगी।
 
9. शिवलिंग पर दूर्वा अर्पित करें। इससे दीर्घायु होती है। ऐसा करने से भोलेनाथ के साथ-साथ श्रीगणेश की भी कृपा प्राप्त होती है। 
 
10. नियमित रूप से आंकड़े (आक) के फूल  की माला बनाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती है। 
 
11. शिवलिंग पर चावल अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास स्थाई हो जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर अर्पित चावल खंड़ित न हो। ऐसा करने से भगवान शिव के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। 
 
12. प्रतिदिन शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करने से घर अौर संतान से संबंधित समस्याएं दूर होती है। इससे संतान के कार्यों में भी सफलता मिलती है।

13. *विशेष:-* विवाहित महिलाएं जिनके दाम्पत्य जीवन मे किसी प्रकार की कमी, कष्ट या दुख आ गया हो वह, तथा विवाह योग्य वह कन्यायें जिनका विवाह होने मे बाधा आ रही हो उन्हे सावन माह के 30 व्रत या सावन के चारो सोमवार के व्रत करने चाहिए तथा साथ मे 40 दिन तक गौरी पूजन करना चाहिये, इससे बाधा- दुख इत्यादि समाप्त होकर सुखी विवाहित जीवन प्राप्त होगा ।

14. पुरूषों को यह व्रत करने से, तथा साथ मे शिवगायत्री मंत्र करने से कारोबारी जीवन मे तरक्की, तथा आर्थिक रूप से मज़बूती मिलती है।
शिव गायत्री मंत्र :-
*ॐ सदाशिवाय विद्महे सहस्राक्ष्याय धीमहि।*
*तन्नः साम्बः प्रचोदयात्॥*

15. जिनकी कुंडली मे कालसर्पदोष या पितृदोष हो, तथा जो व्यक्ति नशे, जुआ, तथा चरित्रहीनता जैसी बुरी लतो के न छोड़ पा रहे हो, वह लोग विधिवत् व्रत रखकर आराधना करते हुए प्रतिदिन "श्री शिवापराध क्षमा स्तोत्र" का पाठ करे, तथा भगवान शिव से अपने पाप कर्मो से मुक्ति हेतु प्रार्थना करे।

 चरित्रहीनता तथा अन्य कर्मो से कुलषित हुआ उनका कुल तथा पूर्वज जोकि परलोक से उनके कर्मो को देखते हुए पीड़ा मे तडपते होगें, उन पितरो को को राहत मिलेगी, तथा स्वंय वह मनुष्य अगले जन्मो मे पापो की पुनरावृत्ति से बचते हुए पशु योनि मे जाने से बचेगे । इससे निश्चित रूप से उनके पितरो का उद्धार होगा।

*(क्रमंशः)*
*लेख के पांचवे भाग मे कल "सावन मास मे शिव पूजन द्वारा कष्ट निवारण हेतु उपाय"।*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
__________________________
☀️

*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*रविवार,16.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- चतुर्दशी तिथि 10:08 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मिथुन राशि मे।*
*नक्षत्र- आद्ररा ऩक्षत्र 17 जुलाई 2:39 am तक*
*योग- ध्रुव योग 8:33 am तक (शुभ है)*
*करण- विष्टि करण 9:17 am तक* 
*सूर्योदय- 5:33 am, सूर्यास्त 7:21 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 11:59 am से 12:55 pm*
*राहुकाल- 5:57 pm से 7:21 pm (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पश्चिम दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 

*भद्रा:-*  15 जुलाई 8:33 pm से 16 जुलाई 9:21 am तक (भद्रा मे मुण्डन, गृहारंभ, गृहप्रवेश, विवाह, रक्षाबंधन आदि शुभ काम नही करने चाहिये , लेकिन भद्रा मे स्त्री प्रसंग, यज्ञ, तीर्थस्नान, आपरेशन, मुकद्दमा, आग लगाना, काटना, जानवर संबंधी काम किए जा सकतें है)
_________________________

*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
______________________

*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

कौन था पहला कावड़िया


कौन था पहला कावड़िया 
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किसने किया था सबसे पहले शिव लिंग का जल अभिषेक?

श्रावण का महीना आते ही हर कोई शिव की भक्ति में झूमने लगता है. इस पावन त्यौहार में पुरे उत्तर भारत और अन्य राज्यो से कावड़िये शिव के पवित्र धामो में जाते है तथा वहां से गंगाजल लाकर शिव का जलाभिषेक करते है.

कावड़ियो को नंगे पैर बहुत दूर चलकर गंगा जल लाना होता है तथा शर्त यह होती है की कावड़ी, शिव कावड़ को जमीन में नही रखता. इस प्रकार शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का समाना करके गंगा जल लाते है तथा उससे शिव का जलाभिषेक करते है.

परन्तु क्या आपने कभी यह सोचा है की आखिर वह कौन पहला व्यक्ति होगा जो सबसे पहला कावड़ी था तथा जिसने सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त करी व इस परम्परा का आरम्भ हुआ.ऋषि जमदग्नि ने उनका बहुत अच्छी तरह से आदर सत्कार किया उनकी सेवा में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी . सहस्त्रबाहु ऋषि के आदर सत्कार से बहुत ही प्रसन्न हुआ परन्तु उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी की आखिर एक साधारण एवम गरीब ऋषि उसके और उसकी सेना के लिए इतना सारा खाना कैसे जुटा पाया .

तब उसे अपने सेनिको से यह पता लगा की रसिहि जमदग्नि के पास एक कामधेनु नाम की दिव्य गाय है. जिससे कुछ भी मांगो वह सब कुछ प्रदान करती है.

जब राजा को यह ज्ञात हुआ की इसी कामधेनु गाय के कारण ऋषि जमदग्नि संसाधन जुटाने में कामयाब हो पाया तो उस गाय को प्राप्त करने के लिए सहस्त्रबाहु के मन में लालच उतपन्न हुआ.

उसने ऋषि से कामधेनु गाय मांगी परन्तु ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु गाय को देने से मना कर दिया. इस पर सह्त्रबाहु अत्यंत कोर्धित हो गया तथा उसने कामधेनु गाय को प्राप्त करने के लिए ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी.

जब यह खबर परशुराम को पता लगी की सहस्त्रबाहु ने उनके पिता की हत्या कर दी है तथा वह कामधेनु गाय को अपने साथ ले गया है तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए. उन्होंने सहस्त्रबाहु के सभी भुजाओ को काट कर उसकी हत्या कर डाली.बाद में परशुराम ने अपने तपस्या प्रभाव से अपने पिता जमदग्नि को पुनः जीवनदान दिया. जब ऋषि को यह बात पता चला की परशुराम ने सहस्त्रबाहु की हत्या कर दी तो उन्होंने इसके पश्चाताप के लिए परशुराम जी से भगवान शिव का जलाभिषेक करने को कहा.

तब परशुराम अपने पिता के आज्ञा से अनेको मिल दूर चलकर गंगा जल लेकर आये तथा आश्रम के पास ही शिवलिंग की स्थापना कर शिव का महाभिषेक किया व उनकी स्तुति करी .

जिस क्षेत्र में परशुराम ने शिवलिंग स्थापित किया था उस क्षेत्र का प्रमाण आज भी मौजूद है. वह क्षेत्र उत्तरप्रदेश में आता है तथा पूरा महादेव के नाम से 
प्रसिद्ध है।
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सावन मे कांवड यात्रा तथा जलाभिषेक, भाग-1


लेख:-सावन मे कांवड यात्रा तथा जलाभिषेक, भाग-1

वर्ष 2023 मे कांवड़ यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से होगी और 15 जुलाई 2023 तक चलेगी।

सावन माह शिवरात्रि जलाभिषेक:-
हिंदू शास्त्रों के मुताबिक मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। लेकिन सावन की शिवरात्रि का अलग महत्व है। इस दिन भगवान आशुतोष की विशेष पूजा अर्चना के साथ शिवालयों में जलाभिषेक तथा कावंडियो द्वारा लाये गये गंगाजल से अभिषेक करके अपनी कांवड यात्रा को पूर्ण करने की परंपरा है।

पंचांग के अनुसार साल 2023 में सावन महीने में शिवरात्रि 15 जुलाई, शनिवार को पड़ेगी।
सावन मास की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 15 जुलाई को शाम 8:33 बजे से प्रारम्भ होकर इसका समापन 16 जुलाई को रात्रि 10:09 बजे पर होगा। मंदिरों में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन शिवभक्त भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करेंगे। 

*चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:- 15 जुलाई- 8:33 pm* 
*चतुर्दशी तिथि समाप्त:- 16 जुलाई-10:09 pm* 

15 जुलाई को प्रदोष काल एवं 16 जुलाई को शिवलिङ्ग पर जलाभिषेक हेतु प्रातःकाल सूर्योदय के पश्चात् 2 घण्टे 24 मिनट का समय श्रेष्ठ रहेगा। 

*श्रावण शिवरात्रि जलाभिषेक मुहूर्त:-*
*1. 15 जुलाई प्रदोषकाल मुहूर्त- 7:30 pm से 9:32 pm तक*
*2. 16 जुलाई प्रातः 5:38 am से 8:22 am तक, तत्पश्चात सायः 7:29 pm से 9:31 pm तक*

*विशेष:-* भक्तगण इन मुहूत्तों में से कांवड़ जलाभिषेक हेतु जल को लाने एवं जलांजली अभिषेक हेतु कोई भी मुहूर्त्त ग्रहण कर सकते हैं*

*विशेष:-* कुछ विद्वान मुख्य मुहूर्त्त यानि श्रावण शिवरात्रि, वाले दिन सारा दिन ही अभिषेक करते हैं, तथा कुछ प्रदोषकाल व निशीथ में जलाभिषेक करते हैं। आर्द्रा नक्षत्र तथा मिथुन लग्न विशेष रूप से शिव पूजन एवं जलाभिषेक के लिए शुभ माना गया है।

हिन्दू धर्म मे श्रावण माह में शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन वेद तथा पुराणो में किया गया है। चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है। शिव मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है।

सावन का यह माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। कांवड़ियों द्वारा जल लाने की यात्रा के आरंभ की कुछ तिथियाँ होती हैं। इन्ही तिथियों पर कांवड़ियों को यात्रा करना शुभ रहता है। 

श्रावण के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा काँवर यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लाखों शिव भक्त दूरस्थ तथा दुर्गम स्थानों जैसे गोमुख, श्री अमरनाथ, श्री हरिद्वार, नीलकण्ठ एवं गंगा आदि तीर्थो से पवित्र गंगाजल के कलश से भरी काँवड़ को अपने कंधों रखकर पैदल लाते हैं और उस गंगा जल से भगवान् शिव के प्रतिष्ठित मन्दिरों, ज्योतिर्लिङ्गों, विग्रहों, स्वरूपों तथा क्षेत्रीय मन्दिरों में शिवभक्त कांवड़ियों द्वारा श्रद्धारूपी श्रीगङ्गाजल का अभिषेक किया जाता है।   

स्कन्दपुराणानुसार श्रावण मास में नियमपूर्वक नक्त व्रत करना चाहिए, और महीने भर प्रतिदिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

प्रतिवर्ष होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को काँवरिया अथवा काँवड़िया कहा जाता है। भगवान् शिव की प्रसन्नता हेतु आषाढ़ पूर्णिमा से लेकर सम्पूर्ण श्रावण मास, शिवभक्त कांवड़िये तीर्थ स्थलों तथा अन्य तीर्थ स्थलो से गंगा जल लाकर इसी प्रकार से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

*कांवड लाने तथा जलाभिषेक करने का पौराणिक महत्व:-*
हिन्दू धर्म शास्त्रों मे प्रतिवर्ष सावन मास में कांवड लाने तथा भगवान शिव का जलाभिषेक करने के कई कारणों का उल्लेख किया गया है, जिसमें से दो मुख्य कारण इस प्रकार से है-

*1. प्रथम कारण:-*
सतयुग मे देवासुर संग्राम के समय समुद्र मंथन से जो 14 रत्न प्राप्त हुए थे, उनमे "अमृतकलश" से पहले "कालकूट" नामक हलाहल यानि विष भी प्राप्त हुआ था। सृष्टि की रक्षा तथा सर्वकल्याण हेतु उस भयंकर विष को स्थान देने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया, उस विष को कण्ठ मे धारण करने से विष के घातक प्रभाव से भगवान शिव का बदन भयानक गरमी से झुलसने लगा, तब इस भीषण जलन से मुक्ति प्रदान करने के लिए देवी-देवताओ, ऋषियों-मुनियों तथा शिवगणों ने गंगाजल, तथा अन्य पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव का अभिषेक करके, विष की तीव्र ज्वाला को शान्त किया। 

तभी से श्रावण मास मे शिवकृपा पाने हेतु सावनमास की पूजा, अभिषेक तथा कांवड़ यात्रा की परंपरा शुरू हुई, और तभी से ही विष के कण्ठ मे धारण विष के प्रभाव से भगवान शिव को नीलकंठ भी क्हा जाने लगा ।

शिवपुराण' में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में आराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है।

*2. द्वितीय कारण:-*
भगवान शिव को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है, क्योंकि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे, और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है। अतः शिवभक्तो ने भगवान शिव की प्रसन्नता पाने हेतु सावन मास में भगवान का जलाभिषेक करना प्रारम्भ कर दिया।


*सावन मे शिव जलाभिषेक का फल:-*
श्रावण मास भगवान शिव का जलाभिषेक करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इस विषय में प्रसिद्ध एक पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास में जो भी मनुष्य कांवड लाता अथवा शिव का जलाभिषेक करता है, उसकी समस्त इच्छाएं पूर्ण होती है। 

इन दिनों किया गया जलाभिषेक, दान-पुण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल देने वाला होता है। इस जलाभिषेक के फलस्वरूप  अनेक कामनाएं तथा उद्देश्यों की पूर्ति हो सकती है, इससे सुखी वैवाहिक जीवन, संतान सुख, सुख-समृद्धि प्राप्ति, मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति, तथा संतान सुख अर्थात कुल वृद्धि कारक होता है। इससे लक्ष्मी प्राप्ति और यश-कीर्ति भी प्राप्त होती है।

कुछ लोगों का भ्रम है कि श्रावण भाद्रपद मास में नदियां रजस्वलारूप हो जाने से उनका जल पवित्र नहीं होता। परन्तु स्कन्दपुराण में स्पष्ट लिखा है कि सिन्धु, सूती, चन्द्रभागा, गंगा, सरयू, नर्मदा, यमुना, प्लक्षजाला, सरस्वती- ये सभी नंदसंज्ञा वाली नदियां रजोदोष से युक्त नहीं होती है। ये सभी अवस्थाओं में निर्मल रहती है।

*(समाप्त)*
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*आगामी लेख:-*
*1. 5 जुलाई के पंचांग मे "सावन मास"पर धारावाहिक लेख, तत्पश्चात 16 जुलाई के पंचांग से लेख के चौथे भाग, तथा अगले भागो का प्रसारण।*
*2. 15 जुलाई के पंचांग मे "सावन शिवरात्रि पर भक्तो तथा कांवडियो द्वारा जलाभिषेक" विषय पर लेख।*
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*जय श्री राम*
*कल का पंचांग 🌹🌹🌹*
*शनिवार,15.07.2023*
*श्री संवत 2080*
*शक संवत् 1945*
*सूर्य अयन- दक्षिणायन, उत्तर गोल*
*ऋतुः- वर्षा ऋतुः।*
*मास- प्रथम शुद्ध श्रावण मास।*
*पक्ष- कृष्ण पक्ष ।*
*तिथि- त्रयोदशी तिथि 8:32 pm तक*
*चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे 11:22 am तक तदोपरान्त मिथुन राशि।*
*नक्षत्र- मृगशिरा ऩक्षत्र 16 जुलाई 00:23 am तक*
*योग- वृद्घि योग 8:22 am तक (शुभ है)*
*करण- गर करण 7:52 am तक* 
*सूर्योदय- 5:33 am, सूर्यास्त 7:21 pm*
*अभिजित् नक्षत्र- 11:59 am से 12:55 pm*
*राहुकाल- 9 am से 10:43 am (शुभ कार्य वर्जित )*
*दिशाशूल- पूर्व दिशा।*

*जुलाई शुभ दिन:-* 19, 21 (दोपहर 12 उपरांत), 22 (सवेरे 9 उपरांत), 23, 24, 25 (दोपहर 3 तक), 26, 28

*जुलाई अशुभ दिन:-* 15, 16, 17, 18, 20, 27, 29, 30, 31. 
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*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*                   
 15 जुला०- मासिक शिवरात्रि। 16 जुला०- कर्क संक्रांति (पुण्यकाल 11:30 am तक)। 17 जुला०- श्रावण/सोमवती अमावस्या। 18 जुलाई- श्रवण (अधिक) मलमास आरंभ। 29 जुला०- पद्मिनी एकादशी। 30 जुला०- प्रदोष व्रत।
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*विशेष:- जो व्यक्ति वाराणसी से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*
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*आपका दिन मंगलमय हो*. 💐💐💐
*आचार्य मोरध्वज शर्मा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी उत्तर प्रदेश*
9648023364
9129998000

कामदा एकादशी व्रत 19-04-2024

☀️ *लेख:- कामदा एकादशी, भाग-1 (19.04.2024)* *एकादशी तिथि आरंभ:- 18 अप्रैल 5:31 pm* *एकादशी तिथि समाप्त:- 19 अप्रैल 8:04 pm* *काम...